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शिर्डी के साँई बाबा जी के दर्शनों का सीधा प्रसारण... अधिक जानने के लियें पूरा पेज अवश्य देखें

शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Tuesday, 18 March 2014

ओ शिर्डी वाले बाबा मैं तेरा हो गया

ॐ साईं राम


जब से मुझको साईं तेरी भक्ति मिली ...
मेरे मुरझाये मन में हैं कलियाँ खिली ...
जो न सोचा कभी था वही हो गया ..
ए शिर्डी वाले बाबा मैं तेरा हो गया ....


धन दौलत न चाँदी सोना दे ,
बाबा अपने चरणों में मुझे एक कोना दे ,
(((साईं))) तेरी सेवा ही मेरी जागीर हो ,
मन-मंदिर में बस तेरी ही तस्वीर हो

Monday, 17 March 2014

तेरा दामन छोडू कैसे

ॐ सांई राम

फूल भरे है दामन दामन
लेकिन वीरान गुलशन गुलशन
अक्ल की बातें करने वाले
क्या समझेगे दिल की धड़कन
कौन किसी के दुःख का साथी
आपने आसू अपना दामन
सांई,तेरा दामन छोडू कैसे
मेरी दुनिया तो बस तेरा दामन

जय सांई राम!!!

 मेरे बाबा तेरी रहमत की भीख मांगते हैं हम
मेहरबान कोई न तुझ सा है यह भी जानते हैं हम
 एक बस तू ही सुनने वाला है फ़रियाद टूटे हुए दिल की
झुकाया सर जो सजदे में,हो गयीं ये आँखें नम
ख़ुशी में भूल जाते हैं,मिले लेकिन जो ग़म कोई
दामन फैला कर तेरे दर पर चले आते हैं हम
सुना है बिन मांगे मिलता है दरबार-ए-इलाही में
कैसे जायेंगे भला हो के मायूस तेरे घर से हम
कहाँ जाएँ तेरे बन्दे न हो तू यूं ख़फा हमसे
  " हिमेंद्र " हैं गुनाहों पर, तू करदे अब उस पे करम

Sunday, 16 March 2014

सभी जीवों में साईं है

ॐ साईं राम


सभी जीवों में साईं है
होते सभी समान,
सेवा कर सब जीवों की
यही साईं का ज्ञान |
सदा  अमीरी  न  रहे  
श्रंगार लुप्त  हो  जाये,  
एक  फकीरी  है  अमर 
साईं  तक  ले  जाये |

ॐ श्री साईं नाथाये नमः

Saturday, 15 March 2014

मेरा साईं कहंदा है गुस्सा त्यागो

ॐ साईं राम

अपने साईं नूं कोई समझ न पाया
लीला उस दी अपरम्पार
फूल वी उगाए ते कंडे वी लगाए
पतझड़, सावन, सर्दी, गर्मी , 
नाल बनाई बसंत-बहार
सुख-दुख है सब उस ने बनाए
कारन-करावन वाला ओ आप
मेरा साईं कहंदा है गुस्सा त्यागो
नफरत छड दो ,करो सब न नूं रज रज प्यार
साईं दी कहानियाँ नूं पड़ के समझो
समझ समझ के हो जाओ तैयार
हुन प्रेम -प्यार नूं मन विच वसाओ
गुस्सा -नफरत , लालच- लोभ,
अंदरों कड के मारों बाहर
जय साईं राम!!!

Friday, 14 March 2014

मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै

ॐ साईं राम 

इक नज़र मेहर दी तक लै
मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै 
मैं होर किसे तों की लैना
तेरे दर दा हो के जी लैना
इक वारी पल्ला फड लै
मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै
मैं दर तेरे ते मर जावां
तेरे नाम ए जिंदगी कर जावां
इक वारी पल्ला फड लै
इक वारी दर ते सद लै
मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै
मैं चन्गा हाँ या मंदा हाँ 
बस नाम तेरे विच रंगा हाँ
मेरी जिन्दडी दा पल्ला फड लै
मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै
तेरे इश्क ने नच्चन ला दित्ता
नच्चन दा नहीं सी वल मैनू
पैरां विच घुंघरू पा दित्ता
तेरे इश्क ने मंगन ला दित्ता
मंगने दा नहीं सी वल मैनू
हथ विच कांसा फडवा दित्ता
इक वारी दर ते सद लै 
मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै
जिदा विच शिर्डी दे डेरा ए
ओ सिर दा साईं मेरा ए
मैं होर किसे तो की लैना
तेरे दर दा हो के जी लैना
इक वारी दर ते सद लै
मेरे साईंयां मैनू कुत्तेयाँ च रख लै

Thursday, 13 March 2014

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 16/17

ॐ सांई राम


आप सभी को साँई रसोईं छत्तरपुर की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है |

हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा | किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है |


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 16/17
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शीघ्र ब्रहृज्ञान की प्राप्ति
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इन दो अध्यायों में एक धनाढ्य ने किस प्रकार साईबाबा से शीघ्र ब्रहृज्ञान प्राप्त करना चाहा था , उसका वर्णन हैं ।


Wednesday, 12 March 2014

साईं बाबा जी ने कहा था :

ॐ सांई राम


साईं बाबा जी ने कहा था :

"मै तुम्हारे ह्रदय मे विराजमान हूँ, सभी जीवित प्राणियों के ह्रदय में, मै ही व्याप्त हूँ"

"चाहे इस संसार में तुम कही भी जाओ, में हर जगह तुम्हारे साथ ही जाता हूँ | तुम्हारा ह्रदय ही मेरा घर है; में तुम्हारे अंत:करण में निवास करता हूँ" |

"चाहे इस संसार में तुम कही भी जाओ, में हर जगह तुम्हारे साथ ही जाता हूँ | तुम्हारा ह्रदय ही मेरा घर है; में तुम्हारे अंत:करण में निवास करता हूँ" |


मुझे सबसे ज्यादा प्यारा वो भक्त है जो हर किसी जरुरतमंद इंसान की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता हो और हर किसी के सुख और दुःख में शामिल होता हो और किसी गरीब, बेसहारा जरुरतमंद इंसान की मदद करना ही तो मेरी भक्ति करना है ......अल्लाह मालिक !!

Tuesday, 11 March 2014

तेरा हाथ जिसने पकड़ा

ॐ साईं राम

तेरा हाथ जिसने पकड़ा वो रहा न बेसहारा
दरिया में ड़ूब कर भी उसे मिल गया किनारा
सद्गुरु से जो मिला है कहीं और क्या मिलेगा
ये ऐसा सिलसिला है भगवान जा मिलेगा
डूबा जो प्रेम सागर मिलता उसे किनारा
तेरा हाथ जिसने पकड़ा वो रहा न बेसहारा
मन खोजता उसी को जिसने इसे सवांरा
जब भी जुबान खोली उसका ही नाम आया
सुनता है प्रभु उसीकी जिसने उसे पुकारा
तेरा हाथ जिसने पकड़ा मिलता उसे किनारा
झूठी है सारी दुनिया झूठी है इसकी बातें
झूठा है रूप इसका झूठी सारी ज़माते
समझाया जिंदगी ने बड़े काम का इशारा
तेरा हाथ जिसने पकड़ा उसे मिल गया किनारा

Monday, 10 March 2014

बाबा की द्वारिकमाई

ॐ साईं राम  

मेरे साईं नाथ की महिमा बड़ी निराली है
बाबा से जिसने प्यार किया
उसके घर में मनती रोज दिवाली है
मेरे साईं नाथ की महिमा बड़ी निराली है
उसके दर पे बनके आया जो भी सवाली है
बाबा ने उस पे रहमत बरसा डाली 
बाबा से जिसने जो माँगा उसकी बात कभी न टाली है
आ यहाँ जो खाली जाये हो तो कोई मुझे बताये
बाबा की द्वारिकमाई से मिलती सबको निवाली है
बाबा के शिर्डी आने से हुई जग में उजयाली है
तुम भी जाकर दर्शन कर लो
वहा सबको किस्मत बदलने वाली है
मेरे साईं नाथ की महिमा बड़ी निराली है