You are visitor No.

शिर्डी के साँई बाबा जी के दर्शनों का सीधा प्रसारण... अधिक जानने के लियें पूरा पेज अवश्य देखें

शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Monday, 10 February 2014

अपना बनाया साईं ने

ॐ साईं राम


दर दर मैं तो भटक रहा था …
दर दर मैं तो भटक रहा था …
अपना बनाया साईं ने |
कई जन्मो से तड़प रहा था ...
अपना बनाया साईं ने ...
मुझे अपनाया साईं ने |


 ख़ुद खाया तो क्या खाया,
अपनी  भूख  बुझाय |
जो भूखों को खाना दे,
वो साईं को भाये |
**********************************
***********************************

Sunday, 9 February 2014

आज तेरे दर पर आया हूँ

ॐ सांई राम



बाबा मुझे भी इंसान बना दो
तुम्हारे दर पर खड़ा हूँ
थक गया हूँ जीवन से
सर से सारा भार उतार दो
झूठ , फरेब ,क्रोध , मोह के
चक्रव्यूह में फसा हुआ हूँ
माया के जाल से
मुझे आज मुक्त करा दो
जीवन की तीखी धूप ने
मेरी भावनाओं को झुलसा दिया है
इस तपती धूप पर
अपनी ठड़ी छाव बिछा दो
करूणा, क्षमा का वास
जीवन से मिट गया है
इस कठोर दिल को
दया का पाठ पड़ा दो
धन दौलत की आस ने
बिखेर दिया है मुझे
इस टूटे हुए आईने को
समेट लो अपने हाथो में
 

आज तेरे दर पर आया हूँ
खाली ना लौट के जाऊगा
तेरे विश्वास को अपनी
आत्मा में बसाऊगा
तुझे अपना बनाऊगा
जीवन की हर ठोकर खायी है मैंने
अब ना अपनी गलती दोराहुगा
थाम लुगा तेरा आचल
और इंसान बनके जाऊगा

Saturday, 8 February 2014

मुझ को अपना दास बना लो ............

ॐ साईं राम


ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे, तुझ बिन काटे कौन ओ साईं मेरे दुखों के घेरे |
ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे, ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे |
मुझ को अपना दास बना लो, दर दर की ठोकर से बचा लो |
मैं हूँ ज़माने का ठुकराया, मुझ पे करो करुणा की छाया |
         मेरे दिन भी फेरो साईं, लाखों के दिन फेरे |
ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे, ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे |
न मांगूं मैं चांदी सोना,  मुझ को नहीं दौलत का रोना |
बस इतनी सी अर्ज़ सुनो ना, दे दो चरणों में इक कोना |
ज्ञान की ज्योत जला दो मन में, कर दो दूर अंधरे |


ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे, ओ साईं मेरे आन पड़ा दर तेरे |

Friday, 7 February 2014

श्री दास गनु का प्रयाग स्नान

ॐ साईं राम


बाबा के अनेक भक्त थे जिनमे से एक दास गनु थे दास गनु ने बाबा की कीर्ति अपने भजन कीर्तनो से लोगो के पास पहुंचाई | एक बार दास गनु को गंगा स्नान का विचार आया, तब वह बाबा के पास गंगा स्नान करने के लिए काशी जाने की अनुमति लेने गए, तब बाबा ने कहा, इतनी दूर व्यर्थ भटकने की क्या आवश्यकता है, अपना काशी तो यही है, बस तुम मुझपर विश्वास रखो, और जैसे ही दास गनु बाबा के चरणों में नत हुए तब बाबा के चरणों से गंगा, यमुना की धरा बहने लगी, यह चमत्कार देखकर दास गनु की भक्ति और प्रेम और अधिक बढ़ गया और उनकी आँखों से अश्रु धरा बहने लगी !!

जिस प्रकार नदी पार करते समय हम नाविक पर विश्वास रखते है उसी प्रकार का विश्वास भवसागर से पार होने के लिए हमे सदुगुरु पर रखना चाहिए !!

!! अनंतकोटि ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज योगिराज परब्रह्म
श्री सच्चिदानंद समर्थ  सद्गुरु श्री साईं नाथ महाराज की जय  !!

Thursday, 6 February 2014

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 11

ॐ सांई राम

आप सभी को साँई रसोईं  छत्तरपुर की और से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं
हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है
हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा
किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है


श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 11

----------------------------------
सगुण ब्रहम श्री साईबाबा, डाँक्टर पंडित का पूजन, हाजी सिद्दीक फालके, तत्वों पर नियंत्रण ।
-----------------------------------

इस अध्याय में अब हम श्री साईबाबा के सगुण ब्रहम स्वरुप, उनका पूजन तथा तत्वनियंत्रण का वर्णन करेंगे । 


Wednesday, 5 February 2014

सद्गुरु साईं जी का साथ रहे..

ॐ सांई राम


जिंदगी में सिमरन की मिठ्ठास रहे
अपने सद्गुरु पे पूरा विश्वास रहे
कहने को तो दुखों की नगरी है ज़िन्दगी 
पर ख़ुशी से कट जावे अगर
सद्गुरु साईं जी का साथ रहे..


श्री साईं शरणम्,
ॐ सांई मंगलम्,
सांई नाम मंगलम्.
पावन भूमि शिरडी
सांई धाम मंगलम्...


जो शिरडी में आयेगा,
आपद दूर भगाएगा ।। 1 ।।
चढे समाधि की सीढ़ी पर,
पैर तले दुःख की पीढ़ी पर ।। 2 ।।
त्याग शरीर चला जाऊंगा,
भक्त-हेतु दौड़ा आऊंगा ।। 3 ।।
मन में रखना दृढ़ विश्वास,
करें समाधि पूरी आस ।। 4 ।।
मुझे सदा जीवित ही जानो,
अनुभव करो सत्य पहचानो ।। 5 ।।
मेरी शरण आ खाली जाये,
हो तो कोई मुझे बताये ।। 6 ।।

जैसा भाव रहा जिस जन का,
वैसा रुप हुआ मेरे मन का ।। 7 ।।
भार तुम्हारा मुझ पर होगा,
वचन न मेरा झूठा होगा ।। 8 ।।
आ सहायता लो भरपूर,
जो मांगा वह नही हैं दूर ।। 9 ।।
मुझ में लीन वचन मन काया,
उसका ऋणन कभी चुकाया ।। 10 ।।
धन्य-धन्य वह भक्त अनन्य,
मेरी शरण तज जिसे न अन्य ।। 11 ।।

Tuesday, 4 February 2014

हम सब साईं के रंग में झूमें...

ॐ सांई राम



ॐ नाम प्रथम भगवान का...
जो उपजे यह संसार...
हर मंत्र शुरूआत है ॐ गूंज के साथ...
शांति प्रधान करे संसार को...
सब से महान ॐकार...
आओ सब मिलके गूंज लगाओ
ॐकार साईं नाथ....

साईं तुम ही जानो, तुम ही समझो...
क्या मुझ को हितकर है,
मैं तेरा चाकर हूँ, तुम मेरे ठाकुर हो
मेरा सब भार साईं बस तुम पर है...


दुखी दिलो का दाता साईं
साईं रंग में रंगते सब बहन-भाई
हम सब साईं के रंग में झूमें
साईं हमारे रंग में झूमें
जय जय जय साईं दाता हमारा
मैं हूँ एक भक्त तुम्हारा

Monday, 3 February 2014

मेरे साई के उजालो

ॐ श्री साँई राम जी


साई के उजालो,
मेरे साई के उजालो .
आँखों में सिमट आओ
अंधेरो को निकालो ..

महफ़िल में तेरी आये
तो हम एक हुए हैं .
रस्ते पे तेरे चल के
सभी नेक हुए हैं .
हर पग पे सम्भाला है
तो आगे भी संभालो ..
साई के उजालो .............

बरसों से तुम्हें दिल
की नज़र से ढूंढ़ रही है .
जिस घर में छिपे हो
वो ही घर ढूंढ़ रही है .
परदों से निकलकर
मुझे आँचल में छिपालो ..
साई के उजालो ...........

Sunday, 2 February 2014

साँई जी पर पूर्ण विश्वास रखो...!!

ॐ श्री साँई राम जी  

 

"मुझ पर पूर्ण विश्वास रखो | यधपि मै देहत्याग भी कर दूँगा, परन्तु फिर भी मेरी अस्थियाँ आशा और विश्वास का संचार करती रहेंगी | केवल मै ही नहीं, मेरी समाधि भी वार्तालाप करेगी, चलेगी, फिरेगी, ओर उन्हें आशा का सन्देश पहुँचाती रहेगी, जो अनन्य भाव से मेरे शरणागत होंगे | 

निराश न होना कि मै तुमसे विदा हो जाऊँगा | तुम सदैव मेरी अस्थियों को भक्तों के कल्याणार्थ ही चिंतित पाओगे | यदि मेरा निरंतर स्मरण और मुझ पर दृढ विश्वास रखोगे तो तुम्हें अधिक लाभ होगा | "