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शिर्डी के साँई बाबा जी के दर्शनों का सीधा प्रसारण... अधिक जानने के लियें पूरा पेज अवश्य देखें

शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Saturday, 14 September 2013

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - एक पीर का भ्रम निवृत करना

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



एक पीर का भ्रम निवृत करना

एक दिन एक पीर जी कि रोपड़ में रहता था अपने मुरीदो से कार भेंट लेता हुआ आनंदपुर आया| गुरु जी के दरबार की महिमा संगत का आना-जाना तथा लंगर चलता देख वह बड़ा प्रभावित हुआ| उसने एक सिख से पूछा यह किस गद्दी का गुरु है? सिख ने कहा यह गुरु नानक साहिब जी की गद्दी पर बैठे नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादर जी हैं| पीर ने कहा गुरु नानक जी तो बड़े बली महापुरुष हुए हैं| अगर यह इनकी गद्दी पर विराजमान हैं तो इनमे भी शक्ति होनी चाहिए| सिख ने कहा गुरु जी वैराग्य के पुंज और शक्ति के मालिक हैं|

पीर ने अगला प्रशन किया कि गुरु जी ग्रहस्थी हैं या फकीर? सिख ने उत्तर दिया की गुरु जी ग्रहस्थी हैं| गुरु नानक देव जी भी ग्रहस्थी थे| पीर ने फिर कहा वैराग्य गुरु पीर होकर फिर यह ग्रहस्थ का आडम्बर क्यों?

इसके पश्चात पीर ने गुरु जी के दर्शन करके जब यही सवाल पूछा तो गुरु जी ने कहा साईं लोगों! ग्रहस्थ सब धर्मों से ऊँचा है| यह सारे पीरो-फकीरों, ऋषि-मुनियों को पैदा करता है फिर सबकी गुजरान का आधार रहता है| जो पुरुष ग्रहस्थ धर्म में पूरे उतरते हैं उन्हें अन्तिम समय मुक्ति प्राप्त होती है|

ग्रहस्थ का धर्म है अतिथि की सवा करनी तथा अपनी नेक कमाई से पुण्य दान करना| ऐसा ग्रहस्थी परम सुख प्राप्त करता है|

गुरु जी से यह बात सुनकर पीर ने गुरु जी को माथा टेका और कहा कि अब मुझे इस बात का ज्ञान हो गया है की ग्रहस्थ धर्म पुरुष का मुख्य उदेश्य है इसको बुरा समझना एक बड़ी भूल है|

Friday, 13 September 2013

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - खारा कूआँ मीठा करना

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



खारा कूआँ मीठा करना

श्री गुरु तेग बहादर जी जब गाँव मूलोवाल पहुँचे तो मईया व गोदे ने आपकी खूब सेवा की| गुरु जी को बहुत प्यास लगी| उन्होंने पीने के लिए पानी मंगवाया| परन्तु पानी बहुत खारा था| गुरु जी ने उनसे पूछा कि यहाँ कोई मीठे पानी का कूआँ नहीं है? तब मईया ने कहा कि महाराज! मीठे पानी का कूआँ गाँव से बहुत दूर है| यदि आप हुक्म करो तो वहाँ से मीठा पानी ले आऊँ|

गुरु जी ने वचन किया जाओ वाहि गुरु कहकर यहाँ से ही हमारे पीने के लिए जल ले आओ| येही मीठा हो जायेगा| गुरु जी का वचन मानकर गोंदा ने वैसा ही किया जैसा गुरु जी ने कहा था| गोंदा जब पानी लाया तो गुरु जी ने पी कर बताया कि यह जल बहुत ठंडा और मीठा है| आज से यह कूआँ गुरु का कहावेगा|

जब लोगों को यह ज्ञात हुआ कि गुरु जी के वचनों से खारे कूएँ का पानी मीठा हो गया है, तो संगत श्रद्धा से साथ भेंट लेकर आपके दर्शन को आई| इस गाँव में आपने दो दिन विश्राम किया| मईया के प्रेम और श्रद्धा से खुश होकर उसको गाँव का चौधरी बना दिया|

Thursday, 12 September 2013

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 40

ॐ सांई राम



आप सभी को साँई रसोई छत्तरपुर की ओर से साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं , हम प्रत्येक साईं-वार के दिन आप के समक्ष बाबा जी की जीवनी पर आधारित श्री साईं सच्चित्र का एक अध्याय प्रस्तुत करने के लिए श्री साईं जी से अनुमति चाहते है , हमें आशा है की हमारा यह कदम घर घर तक श्री साईं सच्चित्र का सन्देश पंहुचा कर हमें सुख और शान्ति का अनुभव करवाएगा, किसी भी प्रकार की त्रुटी के लिए हम सर्वप्रथम श्री साईं चरणों में क्षमा याचना करते है...

श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 40 - श्री साईबाबा की कथाएँ
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1. श्री. बी. व्ही. देव की माता के उघापन उत्सव में सम्मिलित होना, और
2. हेमाडपंत के भोजन-समारोह में चित्र के रुप में प्रगट होना ।

इस अध्याय में दो कथाओं का वर्णन है

1. बाबा किस प्रकार श्रीमान् देव की मां के यहाँ उघापन में सम्मिलित हुए । और
2. बाबा किस प्रकार होली त्यौहार के भोजन समारोह के अवसर पर बाँद्रा में हेमाडपंत के गृह पधारे ।

Wednesday, 11 September 2013

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - सिंघा द्वारा गुरु का वचन मानना

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



सिंघा द्वारा गुरु का वचन मानना

अलीशेर से गुरु जी जोगे गाँव आए| आप ने भोपाला गाँव में डेरा लगाया| वहाँ रात ठहर कार आप खीवा कलां जा ठहरे| इस गाँव का एक किसान रोज आपके दर्शन को आता| वह तीन घड़ी बैठा भी रहता| परन्तु एक दिन वह माथा टेक कर झटपट ही उठकर चला गया|गुरु जी ने उससे इसका कारण पूछा कि आज आप जल्दी क्यों जा रहे हो?

सिंघा ने कहा कि गुरु जी आज एक व्यक्ति के यहाँ सगाई है| वहाँ सबको गुड़ मिलना है| मुझे भी अपने हिस्से का गुड़ लेने जाना है| गुरु जी ने वचन किया कि आप यहाँ धैर्य सहित बैठे रहे| आपको घर बैठे ही दो बाँटने आ जाया करेंगे| गुरु जी का वचन सुनकर सिंघा वहीं बैठा रहा|

उधर जिसके घर सगाई थी, जब उसे इस बात का ज्ञान हुआ कि सिंघा गुरु जी के पास बैठा है तो गाँव के चौधरी ने कहा कि साधू संत के पास जाना ठीक है| आगे से तुम्हें उसे दो बाँटने वाले दिया करो| यदि वह खुद ना लेने आए तो उसके घर दे आया करो| उस दिन से सिंघा को दो बाँटने वाले मिलने लगे|

सिंघा के बिना इस गाँव का और कोई भी आदमी गुरु जी के दर्शन करने नहीं आया| सिंघा बहुत प्रसन्न था कि उसने गुरु जी के वचनों को मानकर कितना अच्छा किया|

Tuesday, 10 September 2013

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - जिमींदार द्वारा गुरु के वचनों की उलंघना करना

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



जिमींदार द्वारा गुरु के वचनों की उलंघना करना

एक जिमींदार गुरु तेग बहादर जी की बड़ी श्रद्धा के साथ सेवा करता था| गुरु जी उसकी सेवा पर बहुत खुश थे| उसकी सेवा पर खुश होकर गुरु जी ने वह सारी भेंटा उसको दे दी जो संगत की तरफ से आई थी| गुरु जी ने साथ-साथ यह भी वचन किया कि इस धन से कूआँ लगवाओ और इसके साथ-साथ ही धर्मशाला भी बनवाओ| इसके साथ आपको और कुछ भी करना है| पास ही फलदार वृक्षों का बाग लगवाओ| साथ ही साथ गुरु जी ने यह भी कहा कि इस धन के लालच में मत पड़ना| अगर आप इन्हें अन्य प्रकार से खर्च करोगे तो सब कुछ निष्फल हो जाएगा|

जब गुरु जी चले गए तो जिमींदार को लालच आ गया| उसने लोभ में आकर उस धन का कूआँ अपनी खेती में लगवाने की सलाह कर ली| उसने कारीगरों को बुलाया| कारीगरों को बुलाकर कूएँ का पाड़ खुदवाया| उसमे चक्क उतारा| तो वह वहाँ ही ठहर गया| बहुत जोर लगाया पर चक्क नीचे ना उतरा|

इस कूएँ की खुडल आज तक जिमींदार के खेत में उजाड़ है| इस तरह गुरु जी के वचनों की उलंघना करके जिमींदार ने यह सारा धन ही निष्फल गँवा लिया|

Monday, 9 September 2013

आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनायें

ॐ सांई राम

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - फग्गू का प्रेम

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



फग्गू का प्रेम

काशी से गुरु तेग बहादर जी सासाराम शहर की ओर चाल पड़े| वहाँ पहुँच कर आपने गुरु घर के एक मसंद सिख फग्गू की चिरकाल से दर्शन करने की भावना को पूरा करने के लिए गए| भाई फग्गू ने एक मकान बनवाया| उसने उसका दरवाज़ा बहुत बड़ा रखवाया| उसके आगे एक खुला आँगन भी रखा हुआ था|

लोगों ने फग्गू से जब इसका कारण पूछा कि उसके मकान बनवाकर उसका दरवाज़ा इतना बड़ा क्यों रखा है? फग्गू ने उनका उत्तर दिया कि यह मैंने गुरु जी के लिए बनवाया है| जब वह मेरे घर में आयेगें तब वह घोड़े पर सवार होकर आयेगें| उन्हें बाहर नहीं उतरना पड़ेगा| वह घोड़े पर बैठे-बैठे ही मेरे घर के अंदर आ जाये इसलिए मैंने दरवाज़ा खुला रखवाया है|

फग्गू की इस श्रद्धा भावना को अन्तर्यामी गुरु जान गए| वह रास्ते में सभी को दर्शन देते हुए फग्गू के घर में जा पहुँचे| आप एक दम ही पहुँच गए जिसको देखकर फग्गू बहुत खुश हुआ| उसने गुरु जी के चरणों पर माथा टेका| फिर गुरु जी को पलंघ पर बिठाया जो की उसने विशेष रूप से गुरु जी के लिए ही तैयार किया था| गुरु जी कुछ दिन वहाँ रुके| वह फग्गू की श्रद्धा व प्रेम से की हुई सेवा से प्रसन्न हुए| प्रसन्न होकर आपने फग्गू ब्रह्म ज्ञान की दात बक्शी और उसको निहाल किया| इस नगर के बाहर गुरु जी को एक बाग भी संगत ने भेंट किया, जो कि गुरु का बाग करके प्रसिद्ध है|

Sunday, 8 September 2013

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - आसाम के राजा राम राय को पुत्र का वरदान

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



आसाम के राजा राम राय को पुत्र का वरदान

गुरु तेग बहादर जी की महिमा सुनकर आसाम देश का राजा अपनी रानी सहित गुरु जी की शरण में आया| उसने गुरु जी के आगे भेंट आदि अर्पण की| भेंट अर्पण करने के पश्चात उसने प्रार्थना की कि महाराज! मेरे पास कोई औलाद नहीं है| मुझे पुत्र का वरदान दो जो हमारे राज्य का मालिक बने|

गुरु जी राजे तथा रानी की श्रद्धा व प्रेम पर प्रसन्न हुए| प्रसन्न होकर गुरु जी ने वचन किया कि आपके घर एक धर्मात्मा तथा उदारचित पुत्र होगा| गुरु जी से ऐसा आशीर्वाद लेकर राजा व रानी बहुत प्रसन्न हुए|

यह वचन करके गुरु जी ने अपने हाथ की मोहर का एक निशान राजे के माथे पर लगाकर कहा कि ऐसा निशान आपके घर होने वाले पुत्र के माथे पर भी होगा| तब तुम यह समझ लेना कि यह पुत्र गुरु घर की कृपा है|

गुरु जी के ऐसे वचन सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा| वह बहुत प्रसन्न थे| गुरु जी का चरणामृत लेकर उन्होंने सिखी धारण कर ली| गुरु जी के आशीर्वाद से उनके घर पुत्र पैदा हुआ|

Saturday, 7 September 2013

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ - गुरु वचन मानने में ही सुख

श्री गुरु तेग बहादर जी – साखियाँ



गुरु वचन मानने में ही सुख

श्री गुरु तेग बहादर जी कैथल विश्राम करके बारने गाँव आ गये| इस गाँव के बाहर ही ठहर कर गुरु जी ने पुछा कि यहाँ कोई गुरु नानक देव जी का सिख रहता है? उसने कहा महाराज! यहाँ जिमींदार सिख रहता है|गुरु जी ने उसे बुलाने के लिए कहा|यह आदमी जाकर जिमींदार को बुला लाया|

उसने आकर गुरु जी के चरणों पर माथा टेका|उसने यह भी प्रार्थना की कि मेरे घर आकर विश्राम करो| तब तक मैं अपनी खेती कि कूत (मिनती) करा आऊँ| गुरु जी ने उसे कहा कि आप हमारे साथ घर चले|तुम्हारी खेती का गुरु रखवाला है| तुम कूत कराने ना जाओ|

जिमींदार ने वचन को काटते हुए कहा कि महाराज! आप चले जाये, हम शीघ्र ही आ जायेंगे| ऐसा कहता हुआ वह सिख वहाँ से चल दिया|
जब उसके खेत कि कूत हुई तो पहले वह दो सौ विघा थी, अब वह सौ विघा हो गई|उसके शरीको ने कहा कि कूत करने वाला रिश्वत खा गया है|कूत दुबारा होनी चाहिए|जब खेती कि दुबारा कूत हुई तो वह सौ विघा ही निकली|इस बात से उसे गुरु जी पर विश्वास हो गया कि उसे वचन नहीं काटना चाहिए था|उसने गुरु जी के चरणों पर माथा टेका|उसने सारी बात गुरु जी को बताई|

गुरु जी प्रातकाल उठकर स्नान किया और उसे वचन किया कि आज से आप तम्बाकू पीना छोड़ दो व सिक्ख संगतो कि स्सेवा किया करो| तुम्हारा परलोक सुधर जायेगा|तुम्हारा वंश जब तक हुक्के का त्याग करके खेती करेगा तब तक बहुत बढेगा|परन्तु यदि हूका तम्बाकू पीना आरम्भ कर देगा,तो कंगाल हो जायेगा| सारा धन भी जाता रहेगा|गुरु जी का वचन मानकर जिमींदार ने गुरु जी के चरणों पर माथा टेका और हुक्का पीना छोड़ दिया|

भाई संतोख जी लिखते है कि यह हमने अपनी आँखों से देखा कि जब उसकी कुल का एक आदमी हुक्का पीने लगा तो वह अति गरीब हो गया|