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शिर्डी के साँई बाबा जी के दर्शनों का सीधा प्रसारण... अधिक जानने के लियें पूरा पेज अवश्य देखें

शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Wednesday 16 July 2014

श्री साईं लीलाएं - साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना

ॐ सांई राम




कल हमने पढ़ा था.. मुझे पंढरपुर जा कर रहना है 

श्री साईं लीलाएं

साईं बाबा द्वारा भिक्षा माँगना



साईं बाबा ईशावतार थेसिद्धियां उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ी रहती थींपर बाबा को इन बातों से कोई मतलब नहीं थाबाबा सदैव अपनी फकीरी में अलमस्त रहते थेबाबाजिनकी एक ही नजर में दरिद्र को बादशाहत देने की शक्ति थीफिर भी वे भिक्षा मांगकर स्वयं का पेट भरते थेभिक्षा मांगते समय बाबा कहा करते थे - "ओ माई ! एक रोटी का टुकड़ा मुझे मिले|" बाबा सदैव हाथ फैलाकर भिक्षा मांगा करते थेबाबा के एक हाथ में टमरेल और दूसरे हाथ में झोली हुआ करती थीबाबा रोजाना पांच घरों से भिक्षा मांगते थे तथा कभी-कभी कुछ अन्य घरों में भी फेली लगाया करते थेबाबा रोटीचावल झोली में लेते और तरल पदार्थ - "सब्जीछाछदालदहीदूध आदि टमरेल (टिन के बने हुए पात्र) में लेते थेइस तरह से वह सब एक हो जातासाधु-संत कभी भी जीभ के स्वाद के लिए भोजन नहीं करतेवे समस्त सामग्री को एक जगह मिलाकर उसका सेवन करते हैं और सदा संतुष्ट रहते हैंबाबा ने भी कभी जीभ के स्वाद के लिए भोजन नहीं किया|



साईं बाबा का भिक्षा मांगने का कोई समय निश्चित नहीं थाकभी-कभी सुबह ही 8-9 बजे भिक्षा मांगने निकल जाते थेइस तरह गांव में घूमने के बाद मस्जिद लौट आतेयह भी उनका नित्य क्रम नहीं थायदि मन हुआ तो जाते और जहां चाहते वहां मांगतेजो भी मिलतावह ले आतेउसी में खुश रहते|

मस्जिद में लौटकर आने के बाद भिक्षा में उन्हें जो कुछ भी मिलता थावह सब एक कुंडी में डाल देतेउस कुंडी में से मस्जिद की साफ़-सफाई करने वालाकौवेचिड़ियाकुत्तेबिल्ली आदि आकर अपना हिस्सा ले जातायदि कोई गरीब या भिखारी आया तो उसे भी उसमें से प्रसाद अवश्य मिलताबाबा सब जीवों के प्रति समान रूप से प्रेमभाव रखते थेइसलिए बाबा ने कभी किसी को मना नहीं कियाबाबा उस भिक्षा पर कभी अपना हक नहीं मानते थे|


परसों चर्चा करेंगे..बाइजाबाई द्वारा साईं सेवा

ॐ सांई राम
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===

बाबा के श्री चरणों में विनती है कि बाबा अपनी कृपा की वर्षा सदा सब पर बरसाते रहें ।

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